Thursday, 29 November 2018

जतन

तीखी चुभन
टीसता हुआ मन
कैसा मौसम।

कैसा मौसम
खुद से अनबन
सूना चमन।

सूना चमन
हवाएँ पतझड़ी
मैं विरहन।

मैं विरहन
ढूंढती अपनापन
दूर गगन।

दूर गगन
छूने लेने की जिद
पूरी लगन।

पूरी लगन
परीक्षा है कठिन
करूँ जतन।

करूँ जतन
होंगे ही एक दिन
पूरे सपन।

प्रीति सुराना

अर्जी

हर साँस के साथ होती है आस,
हर आस के साथ बढ़ता है विश्वास,
हर विश्वास के साथ होने चाहिए प्रयास,
न हो कोई भी विपरीत बात अनायास,
न बने रिश्ते गलतफहमियों का ग्रास,
क्योंकि रिश्तों का बंधन होता है खास,
जो भरता है जीवन में नया उजास,....

हाँ
यकीनन है मुझे तुम्हारे प्यार का आभास,
तुम रहना बनकर हौसला सदा मेरे पास,
तुम्हारा होना ही देता है मुझे सुख का एहसास
रब की देहरी में मेरी यही अर्जी यही अरदास,...

और सुनो!
तुम्हारा दुआ करना ये अर्जी मंजूर हो,
यकीनन ये प्रेम ही है,... है न!!!!

प्रीति सुराना

प्रीति सुराना

Monday, 26 November 2018

चादर प्रेम की,..

मतभेद हो तेरे-मेरे
मनभेद न कभी बने,
फैसले जो भी हो
फासले न कहीं ठने।

जब भी बढ़े दूरियाँ
कुछ पल हम थमे,
कुछ करें ऐसा कि मन
सुखद स्मृतियों में रमे।

सपनों और यादों की
कोई नई चादर बुने,
गहन प्रेम का रंग हो
चादर का जो हम चुने।

मस्तिष्क के परे चलो
सिर्फ मन को ही गुने
मौन आँखों को पढ़ें
और न कुछ कहें-सुने।।

प्रीति सुराना

Sunday, 25 November 2018

मन के फेरे

है तेरे-मेरे,
ये मन के फेरे,
मन में अनगिन,
सपनों के डेरे।

नाते न तोड़,
यूँ मुख न मोड़,
जो भी है गिला
सब कुछ छोड़।

सुधरेंगे हालात,
नहीं होगी मात,
पूरे होंगे सब सपने
बनेगी हर बात।

ले हाथों में हाथ
तू चल मेरे साथ
जीवन जी ले
समय ही है नाथ।

प्रीति सुराना

Tuesday, 20 November 2018

रिश्तों के मकान

कहाँ रख पाते हैं
तमाम कोशिशों के बाद भी
खुश
छत, दर और दीवार को साथ-साथ
दर खुले
तो दीवारों पर गर्द,
और दीवार न हो
तो छत के ढहने का डर,
हौसला छोड़ दें,
तो सब कुछ बिखर जाने का खतरा,..

छत बनकर
ढकने की कोशिश करती रही
दरो दीवार को हमेशा
पर मुश्किल में हूं,
ये सोचकर
कि इसमें रहने वाले ही
जब खुश नहीं
तो
किस काम के आखिर
ये रिश्तों के मकान,
जिसमें
छत भी है ,
दर भी है,
दीवारें भी,..
पर सुरक्षित कुछ भी नहीं,..

"नींव में शायद विश्वास के पत्थर कम थे"

प्रीति सुराना

Saturday, 17 November 2018

तालमेल

सपनो के लिए समर्पित हुए तो अपने छूट जाते हैं
अपनों के लिए समर्पित हुए तो सपने टूट जाते हैं
जब भी तालमेल बिठाना चाहा सपनो और अपनों में
कभी समय कभी किस्मत कभी हालात रुठ जाते हैं

प्रीति सुराना

Tuesday, 13 November 2018

खैर,..!

खैर,...!

हाँ!
रोक लिया खुद को
अब आगे किसी सफर का कोई इरादा नहीं,
अपने से या अपनों से कोई वादा नहीं,
चली थी मजबूत इरादे से
सोचा था समय बहुत बलवान है
परिस्थितियाँ बदलने का हुनर रखता है,
और सचमुच
मैंने देखा समय के बदलाव को,
"घूरे के दिन भी फिरते हैं"
ये कहावत याद रही हमेशा
पर अब
ये हमेशा याद रहेगा
कि
"ये समय भी चला जाएगा"
दुख हो या सुख
सावधान अगला पड़ाव इंतज़ार कर रहा है,
और
अकेलापन मुझपर हावी हो जाए
उससे पहले ढूंढना चाहती हूँ
अपने ही भीतर एक गहन एकांत
क्योंकि करना होगा मुझे
विश्लेषण, चिंतन, आत्ममंथन
क्योंकि ये कभी स्वीकार नहीं
कोई लगाए मिथ्या आरोप,
जबकि
जानते हुए किसी को कष्ट देना स्वभाव नहीं,
पर
बिना गलती कटघरे में रहना स्वीकार नहीं,
इसलिए
जीवन की सार्थकता इसी में है
सोचूं, समझूँ और सुधार लूँ
वो सब कुछ जो
जाने-अनजाने, अच्छा बुरा,
किया हो, करवाया हो,
या करते हुए का अनुमोदन किया हो।
जानती हूँ कोई नहीं समझेगा मुझे
अब की बार भी रहेगा
सब गलत, सब अधूरा,
अंततः
न किसी से दोस्ती, न किसी से बैर,...
खैर,...!

प्रीति सुराना

Monday, 12 November 2018

सच के कई रंग

हाँ!
सच के कई रंग होते हैं,
पर अंतिम सच यही है
जहां रिश्ता दिल से होता है
समय के फेरे कितने भी चाल चले,
रिश्ता कितना ही बदले
डोर टूटती नहीं
बल्कि मजबूत होती है।

जीवन के कालचक्र
और
जिम्मेदारियों के निर्वाह के दौरान
रिश्तों में ठहराव भी आता है
पर पुराने होने से,
बातचीत कम होने
या विषयों के बदल जाने से
रिश्ता टूटता या बिखरता नहीं
बल्कि
संतुलन बनाता है।

याद रहे
शादी के लड्डू रोज नहीं खाये जाते,
क्योंकि सिर्फ मीठा
हमेशा नहीं खाया जा सकता।
पौष्टिकता और स्वाद के लिए
हर मसाला महत्वपूर्ण होता है
चाहे नमक हो
शक्कर हो
या मिर्च।

हर रिश्ता
मजबूती और ठहराव पाने के बाद
रिश्ते की तरफ से निश्चिंत होकर
खुद को और मजबूती से
आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है
न कि रिश्ते को भुलाकर
दूर होने का बहाना ढूंढता।

कभी
किसी मोड़ पर
किसी रिश्ते के साथ
ऐसा महसूस हो
तो अपेक्षाओं, शिकायतों
और आरोपों के तमगे नहीं देना
थोड़ा रुकना
थोड़ा संभालना
और समय देना
और विस्थापन की क्रिया अपनाना।

उसकी जगह खुद
और
खुद की जगह उसे रखना,
पूरी ईमानदारी से
पूर्वाग्रहों को त्यागकर
दिमाग से नहीं दिल से
सोचना, समझना और फिर से जीना
वही रिश्ता
तारो ताज़गी के साथ खिल उठेगा।

सनद रहे
इस पूरी प्रक्रिया के साथ
वही रिश्ता जुड़ा रहता है
जो वाकई निः स्वार्थ प्रेम में पगा हुआ हो
अन्यथा
आजकल सात फेरे भी सात जन्म के नहीं होते
और टूट जाते हैं गुड्डे-गुड़ियों और खिलौनों की तरह।

सुनो!
अहम व्यक्तित्व का अटूट हिस्सा है
टकराता ही है अकसर
अपनों में भी,
पर वहम
व्यक्ति के लिये जहरीला है
रिश्तों को
कसौटियों की नहीं
विश्वास और धैर्य की जरूरत होती है।

हाँ!
कह रही हूँ
ये सब कुछ तुम्हें
हक से
क्योंकि
एक अटूट रिश्ता
हमारे दरमियान भी तो है
जो अब पुराना होने लगा है।

सावधान!!!
हमें नहीं बदलना है
बल्कि
नज़रिया बदलना है
रिश्ते की मजबूती के लिए।
है न?

प्रीति सुराना