Friday, 24 July 2020

श्रद्धेय चंद्रशेखर आज़ाद


तब हम होते तो ये कहते तुमसे,
तुम्हे नहीं यूँ खोना था।
आज खुली आँखों से सोए हैं सब,
तब जागृत कोना-कोना था।
पराधीन तो आज अधिक है
देश का हर इक वासी,
ये मेरा दिल कहता है सचमुच,
आज यहाँ तुम्हें होना था।

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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