तब हम होते तो ये कहते तुमसे,
तुम्हे नहीं यूँ खोना था।
आज खुली आँखों से सोए हैं सब,
तब जागृत कोना-कोना था।
पराधीन तो आज अधिक है
देश का हर इक वासी,
ये मेरा दिल कहता है सचमुच,
आज यहाँ तुम्हें होना था।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना
copyrights protected
तब हम होते तो ये कहते तुमसे,
तुम्हे नहीं यूँ खोना था।
आज खुली आँखों से सोए हैं सब,
तब जागृत कोना-कोना था।
पराधीन तो आज अधिक है
देश का हर इक वासी,
ये मेरा दिल कहता है सचमुच,
आज यहाँ तुम्हें होना था।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:
Post a Comment