Thursday, 2 April 2020

राम से सीखिए

#सब कुछ अपनों के लिए छोड़ देना
राम से सीखिए
त्याग और तप में समता में रह लेना
राम से सीखिए
रघुकुल की रीति निभाने की खातिर
जंगल में रहना
मंगलमय रह जीवन में मर्यादा रखना
राम से सीखिये

#डॉप्रीति समकित सुराना

रात से गले मिलकर

#कुछ नहीं कह पाई 
तुम साथ थे हरपल
कितने  ही अनकहे
ख्वाब  और दर्द थे
बस न  थे मेरे पास
तो वो शब्द  जिनसे
मैं   समझा  सकती
अपने  मन के भाव
फिर  तुम चले  गए
और  मैं  बहुत  रोई
रात से गले मिलकर

#डॉप्रीति समकित सुराना

ऐ शाम हमसे कुछ तो बोल

#क्या है तेरे मन में  राज  तो खोल
शरारतें फिजाओं में यूँ तो न घोल
हमें भी  बता न  तू चाहती क्या है
चुप न रह ऐ शाम तू कुछ तो बोल

#डॉप्रीति समकित सुराना

तुम्हारी ज़बाँ से अगर मैं सुनूँ

#समझती हूँ सब कुछ बिन कहे
तुम्हारा प्रेम, विश्वास, समर्पण
फिर से मैं खिल उठूंगी देखना
तुम्हारी ज़बाँ से अगर मैं सुनूँ

#डॉप्रीति समकित सुराना

जिन्दगी ठहर जा

#थक गई हूँ बहुत
गैरों की होड़ में
दौड़ते-भागते
सुन जिंदगी!
ठहर जा
कुछ पल के लिए
समय की छाँव में
देखना
पीछे छूट रहे थे
वो अपने मिल जाएंगे
तू मेरे साथ लिए रुक
वो हमारे लिए आएंगे

#डॉप्रीति समकित सुराना

सखियों को उपहार

प्रिय समीक्षा, भारती वर्मा बौड़ाई दी
लीजिये मैंने कर ली चुनौती स्वीकार, 
क्योंकि साड़ियों में सौंदर्य झलकता है 
इस बात से मुझे कतई नहीं है इनकार।
यही चुनौती सारी प्यारी सखियों को उपहार,
टैग करुं या न करुं सब सखियाँ कर लेना स्वीकार
सभी सुंदर सखियाँ रहें आत्मविश्वास से परिपूर्ण
यही मेरी शुभकामनाएँ और यही मेरा प्यार।

डॉ प्रीति समकित सुराना

चश्मा

उम्र का तकाज़ा भी था
और 
लोग भी जलने लगे थे
कि अनुभव तो बहुत लिए
पर बाल 
न धूप में सफेद हुए 
न अनुभव से,..!

आखिर
हमनें भी आँखों पर चश्मा चढ़ा लिया
ताकि पढ़ सकें जिंदगी के
तमाम सबक,..सही-सही,..!

और इत्तेफाक भी देखिए
चश्मा भी दूर का देखने के लिए लगा
ताकि हम दूर दृष्टा बन सकें
और करें कुछ ऐसा जो आज कठिन भी लगे
तो दूरगामी परिणाम अच्छे हों,..!

क्योंकि समाजिक दूरियाँ तो हमनें
तभी बना ली थी
जब अक्ल दाढ़ के साथ अक्ल आई
कि पास आकर तो लोग 
आस्तीन में जगह बनाने लगते हैं,..!
बताइए सहीं किया न???

डॉ प्रीति समकित सुराना

रात ये कह कर छेड़ती है

#मेरे छत की गौरैया झगड़ती है
कभी बहती हवाएँ जकड़ती है

खुद में खोए हुए बैठो कभी तो 
तपती धूप भी आकर पकड़ती है

अकेले बैठे तुम्हे याद कर लूँ तो
बेमौसम ही बदलियाँ घुमड़ती है

यादों में जिक्र किसी खास पल का हो
तो ये बहारें इठलाती है, अकड़ती है

शीत लहरों में तुम्हारी बाहों की गर्मी
याद करके खुद ही बाहें सिकुड़ती है

अभी वक्त है तो रोज ही मिलते हो
हवाएँ मुझसे इस बात पर लड़ती है

खुलेंगे सभी बंद रास्ते तो तुम आओगे
रात अब ये कह-कह कर मुझे छेड़ती है

#डॉप्रति समकित सुराना

Tuesday, 31 March 2020

तुम क्या जानो हाल हमारा

#हाँ!
तुम्हें समझ आती है 
केवल वो बातें
जो दिखाई हैं
जो सुनाई देती है
महसूस करना 
तुमनें जरूरी नहीं समझा कभी
तुम दिल से कहाँ सोचते हो?
फिर
तुम क्या जानो हाल हमारा,..!

#डॉप्रीति समकित सुराना

दिन फूलों के बीत रहे हैं

#मौसम ने नहीं तेवर बदले
जब चाहे बिन मौसम बरसे
दिन फूलों के बीत रहे हैं
अन्न तो ओले लील गए हैं
महामारी ने सब कुछ छीना
अब सोचें सब कैसे है जीना
बोए नहीं जो बीज समय पर
सोच कृषक फसलों को तरसे

#डॉप्रीति समकित सुराना

आचरण उपदेश तुम्हारा

#कह-कहकर यूँ  भी मत  समझाओ लोगों  को
कथनी और करनी  अलग हुई  तो  लोग हँसेंगे
समय और परिस्थितियों को पहले खुद समझो
बने आचरण ही उपदेश हमारा वरना लोग हँसेंगे

#डॉप्रीति समकित सुराना

सोने की चिड़िया


(चित्र:- जयति सुराना)

घर के सामने जो बरसों पुराना आम का पेड़ है न!
रहते हैं उसमें उल्लू, तोते, कबूतर, कौए, कुछ गौरैया भी,
उछलती-कूदती है गिलहरियां भी,..
पिछले कुछ दिनों से
इन पंछियो ने सुबह राग छेड़ना ज्यादा कर दिया है
सरगम से चहचहाहट वातावरण को ही नहीं
सुबह को भी संगीतमय कर दिया है
एक उड़ती हुई चहकती हुई 
गौरैया को देखकर जयति के मन मे उभरा एक चित्र
और उस चित्र को देखकर
मुझे भारत की आकृति नज़र आई
मेरे सपनों का चहकता भारत
जिसे एक दिन फिर कहना चाहती हूँ
सोने चिरैय्या
जो गाती है, नाचती है, ठुमकती है
मेरे सपनों के भारत की तरह।
यकीनन
एक दिन फिर होगा भारत
"सोने की चिड़िया"
अगर भारतीयों से साम्प्रदायिकता हटकर एकता में बदल जाए।
सोचो,....जरूर सोचो,... सिर्फ एक बार

डॉ प्रीति समकित सुराना

मेरे बच्चों की पीड़ा

मेरे बच्चों की पीड़ा
(चित्रकार-जयति सुराना)

मेरे घर तो पालतू कुत्ते सिनी-टफी हैं
(मुझे कुत्ते कहना बुरा लगता है😭)
मेरे घर कछुए टूटू-ट्वीटी हैं
22 साल से गौसेवा से जुड़ी हूँ
यानि सुराना परिवार का दिया
सबसे अनुपम उपहार है गौसेवा,
वहाँ के कबूतर खाने में
हजार से ज्यादा जोड़ों में कबूतर हैं
खरगोशों के परिवार हैं
खच्चर हैं, कुत्ते हैं,
छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा जीव
संकट में हो तो आश्रय देने की भावना बचपन से है
मानवों के लिये आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना जैसे वाटर बैड, एयर बैड, ऑक्सीजन, व्हीलचेयर,
व्यक्तिगत स्तर पर कुछ बच्चों की शिक्षा,
कुछ की दवाइयां उपलब्ध करवाना
समकित, मैं, तन्मय, जयति और जैनम
जब तक संभव है उपलब्ध होते हैं
बहुत बड़ा स्वार्थ है मानसिक शांति
आज
ऐसा लगा मानों मेरे बच्चे (सिनी, टफी, टूटू, ट्वीटी)
पूछ रहे हों मां आप घुम्मू क्यों नहीं ले जा रहे,
पापा आप गाड़ी से क्यों नहीं जा रहे
हमने इन्हें कभी नहीं बांधा
और बच्चों जैसा प्रेम दिया।
जानते हैं जब मैं कहती हूँ मैं टफी की माँ नहीं हूँ
तो वो बच्चों की आवाज़ में रोता है
मैं कहीं बाहर से आऊं तो माँ को प्यार करने के लिए
सिनी टफी में कॉमपीटिशन होता है।
आज का सब से बड़ा अचरज
जो गाय रोज सुबह दरवाजे पर गुड़ खाने को आती है
वो अब तीन बार आती है
मानो देखकर जाती है कि हम सब ठीक हैं या नहीं।
ये कोरोटाइन तो हम बिता लेंगे
पर कैसे समझाएं हम अपने उन बच्चों को
जिन्हें हमने कभी कैद में नहीं रखा
आज वो भी समझ रहे हैं हम किसी खतरे की कैद में हैं।
अंदाज़ अलग हो पर ये भी अपनों से प्रेम करते हैं
बेजुबान होकर भी हर दर्द महसूस करते हैं,..!
लव यू ऑल बच्चा
हाँ मैं तुम्हारी माँ हूँ
अभी कैद में सहीं
पर सुरक्षित हूँ

डॉ प्रीति समकित सुराना

इन दिनों जरुरी है

#न निकलूँ घर से ये इन दिनों जरुरी है
कुछ जिम्मेदारियाँ है, कुछ मजबूरी है
कदम नहीं निकाले 
खिंची गई लक्ष्मण रेखा से
पर रोजी-रोटी की खातिर फिक्रमंद हूँ 
क्योंकि गरीब नहीं हूँ कि राशन मिले
न अमीर हूँ कि प्रशासन मिले
मध्यमवर्गी हूँ
प्रमाण चाहिए तो देखना
लिहाफ उतारकर मेरे तकिये का
आंसुओं के दाग बताएँगे
रोज बिलखकर रोती हूँ,.!
तुम होते हो शरीक मेरे हाल के,
पल-पल मेरे मलाल के,
क्योंकि तकिया तो भीग जाता है
पर सबको कैसे कहूँ
तुम्हारा कंधा भिगोती हूँ
तब कुछ घंटे सोती हूँ,..!

#डॉप्रीतिसमकित सुराना

Monday, 30 March 2020

चिट्ठियाँ खो गईं

#कई रतजगे
काटे थे मैंने
तुम्हारे इंतज़ार में
लिखकर बेनाम चिट्ठियाँ
जिसमें
लिखे थे तमाम सपनें
टूटे भी और
पलकों में बसे भी
सारी शिकायतें
सारी ख्वाहिशें
सारे राज जो तुम जानना चाहते थे
हाँ! सच
उस सवाल का जवाब भी
जो सालों तुम पूछते रहे
कि मैं तुम्हें छूता हूँ तो तुम
घबराती क्यों हो
हम तो कट्टी-बट्टी वाले संगी हैं न!
सुनो!
जिस रोज बाबुल की देहरी छूटी
मेरी पोटली जाने कहाँ छूटी
वो सारी चिट्ठियाँ खो गई
और 
जिंदगी के मायने भी!

#डॉप्रीति समकित सुराना

आदमी कितना मजबूर है

#सांकलों से बांधता आया है
सदियों से पशुओं को
पिंजरे में पाले हैं कितने ही
आज़ाद पंछियों को
पर सोचो वो तो बेजुबान थे
कह नही सकते थे व्यथा
आज आदमी कितना मजबूर है
जुबान है पर बोल नहीं सकता।

#डॉप्रीति समकित सुराना

वो एक लम्हा

#सुनो!
मुझको  भर लो बाहों में
प्रेम  भरा  स्पर्श  चाहिये
आलिंगन  और   चुम्बन
प्रेम  का इजहार चाहिए
जाओ आपको कसम है
चाहे कहीं से या कैसे भी
'वो एक लम्हा' ढूंढ लाओ 
जहाँ प्रेम था सिर्फ तुम थे
किसी वायरस का डर नहीं!

#डॉप्रीति समकित सुराना

Sunday, 29 March 2020

भूख का कोई धर्म नहीं

#भूख सिर्फ पेट में पलती है
रोटी हो, पकवान हो या कुछ और
भूख का शरीर या जेहन के अलावा
न कोई देश होता है न कोई ठौर
ठेकेदारों अब तो संभल जाओ
इतिहास का सबसे बड़ा सबक है ये
समय पूछ रहा है कैसे लड़ोगे अब 
क्योंकि भूख का तो कोई धर्म नहीं है

#डॉप्रीति समकित सुराना

घर तन्हाई से भर गया

#पहले बच्चे लौटते थे
बाहर से
सीधे माँ के बिस्तर पर
चक-चक तब तक
जब तक न दे दें पूरी खबर
पति दुकान से आते ही
चलाते मर्जी के चैनल
खाना पीना साथ करना है
तब तक हो हल्ला किलकिल
आज मजबूर होकर
कैद हैं पिंजरे में सब एक साथ
कितनी बातें करें 
कितना शोर
क्या खेलें, क्या देखें टीवी में,
दिन रात एक से, बिल्कुल बोर
थोड़ी दूरी, थोड़ा स्पेस, थोड़ा इंतज़ार
बहुत जरूरी है हर रिश्ते में यार
अभी सब साथ तो हैं
मगर लगने लगा है
सबका अपना-अपना कोना है
और घर तनहाई से भर गया है,..!
हँसता-खेलता जीवन बिल्कुल ठहर गया है,..!
इस तन्हाई से वो शोर बेहतर था
आज आँखों के साथ जी भी भर गया है,..!

#डॉप्रीति समकित सुराना

अब किस बात का झगड़ा जी

#कब तक रोना रोओगे 
अब किस बात का रगड़ा जी
कैसे करोगे फैसला कि कौन 
है बड़ा या तगड़ा जी
किसका धर्म कितना महान
कौन मानव कौन हैवान
औकात दिखा दी एक कीड़े ने
अब किस बात का झगड़ा जी?

#डॉ प्रीति समकित सुराना

अपनों के संग

#बड़ी  जल्दी उकता गए
बैठे-बैठे  आ  गए तंग?
जरा   दिल   से  पूछिए 
तो    रह    जाएंगे   दंग
उम्र भर की थी  मेहनत
सिर  पर  छत  हो  और
कदमों में  अपनी जमीन
कुदरत ने मौका तो दिया
पर कैद भी अपनों के संग

#डॉप्रीति समकित सुराना

साथ यूँ निभाइये

सरहद पर सेना
सैनिक समर्पित
देश यह सुरक्षित
शीश को झुकाइये

गाँव-गाँव गली-गली
कूड़े कचरे का ढेर
करता सफाई कर्मी
शुक्र तो मनाइए

जाग रहे रात-रात
स्वास्थ्य सेवी, डॉक्टर
महामारी फैल रही
आभार जताइए

घर से न निकलो तो
यही बड़ा काम होगा
कुछ नहीं करके भी
साथ यूँ निभाइये 

डॉ प्रीति समकित सुराना

सृजन शब्द से शक्ति का

सृजन  शब्द  से शक्ति का

हिन्द व हिन्दी का सम्मान 
है प्रमाण देशभक्ति का
आइए करें 
सृजन  शब्द  से शक्ति का

डॉ प्रीति समकित सुराना 
 

Friday, 27 March 2020

ख़्वाब के इंतज़ार में

#बोझिल सी है पलकें
भरसक कोशिश भी है
नींद को पुकार रही है
ख़्वाब के इंतज़ार में
वो जानती है ये सच
कि जागती रही अगर
तो भीगने लगेगी ही
दर्द इतने मिले हैं
हकीकत के बाज़ार में
हाँ
पलकें बोझिल हैं
हकीकत के डर से
ख़्वाब के इंतज़ार में,...!

#डॉ.प्रीति समकित सुराना

नहीं रोक पाए उसे

#जिसके पास 
जितनी दौलत थी
खरीद ली सबने 
रोशनी सितारों से,..!
आसमान गैरतमंद था
नहीं रोक पाए उसे
वो उतने हिस्सों में बंट गया
जिसका जितना था।

#डॉप्रीति समकित सुराना

आइसोलेशन



मानवी उठो!
तुम्हें तेज़ बुखार है, डॉ को दिखा आते हैं।
कोरोना वायरस के चलते कहीं आइसोलेशन की नौबत न आ जाए।

नहीं रोहित,..!
रहने दो, मैं ठीक हूँ?
बच्चे कहाँ हैं?

बच्चे अपने कमरे में फ़िल्म देख रहे हैं, मैं अभी ही आया बाहर दोस्तों के साथ कोरोना पर चर्चा लंबी हो गई, क्या करें सब बोर हो रहे, एक मीटर की दूरी तो ठीक है पर 21 दिन व्यापारी व्यापार न करे तो करे क्या?
खैर छोड़ो! तुम डॉ के पास नहीं चल रही हो तो एक कप चाय ही बना दो सिर दर्द से फटा जा रहा है।

मानवी बड़ी मुश्किल से उठी और बोली अरे आज तो मैंने कुर्ता ही उल्टा पहना हुआ है, सुबह से किसी ने नोटिस भी नहीं किया, तुम्हें लगता है मुझे इससे ज्यादा आइसोलेशन की जरूरत है?

मानवी चाय बनाने चली तो गई पर रोहित सकते में था!

डॉ प्रीति समकित सुराना

हाँ दर्द होता है

हाँ दर्द होता है,
ये दिल भी रोता है
कैसे कहूँ,... किससे कहूँ,..?

जो कहने लगूँ तो
कुछ सपने टूटेंगे
साथी कई फिर
बेबात छूटेंगे
हर बार देखा है
ऐसा ही होता है
कैसे कहूँ,... किससे कहूँ,..?
हाँ दर्द होता है
ये दिल भी रोता है

देखे है जीवन में
मंजर बुरे भी तो
किया था एतबार
आखिर टूटे भी तो
कुछ पाने की खातिर
कुछ हर कोई खोता है
कैसे कहूँ,... किससे कहूँ,..?
हाँ दर्द होता है
ये दिल भी रोता है

रही भीड़ में भी
तन्हा हमेशा ही
जो चाहा वो पाकर भी
खुद को तो कोसा ही
खुशी में किसी की
न खुश कोई होता है
कैसे कहूँ,... किससे कहूँ,..?
हाँ दर्द होता है
ये दिल भी रोता है!

जीती जिद से हर जंग
मन हुआ अब मलंग
बाकी न कोई ख्वाहिश
न जीने की उमंग
जिम्मेदारियाँ की खातिर
जीना ही होता है
कैसे कहूँ,... किससे कहूँ,..?
हाँ दर्द होता है
ये दिल भी रोता है।

डॉ प्रीति समकित सुराना

Thursday, 26 March 2020

कोरोना:- प्रकृति की चेतावनी

कोरोना:- प्रकृति की चेतावनी

कोरोना क्या है?:-

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई प्रकार के विषाणुओं (वायरस) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। यह आरएनए वायरस होते हैं। इनके कारण मानवों में श्वास तंत्र संक्रमण पैदा हो सकता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है। इनकी रोकथाम के लिए कोई टीका (वैक्सीन) या विषाणुरोधी (antiviral) अभी उपलब्ध नहीं है और उपचार के लिए प्राणी की अपने प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। अभी तक रोगलक्षणों (जैसे कि निर्जलीकरण या डीहाइड्रेशन, ज्वर, आदि) का उपचार किया जाता है ताकि संक्रमण से लड़ते हुए शरीर की शक्ति बनी रहे।

कोरोना वायरस का वंश:-

अल्फ़ाकोरोनावायरस (Alphacoronavirus)
बेटाकोरोनावायरस (Betacoronavirus) 
गामाकोरोनावायरस (Gammacoronavirus)डेल्टाकोरोनावायरस (Deltacoronavirus) 
वायरस के कोरोनाविरिडाए कुल के ये चार सदस्य है जहाँ अल्फ़ाकोरोनावायरस और बेटाकोरोनावायरस मूल रूप से  चमगादड़ में संक्रमण करने वाले वायरस हैं, वहाँ  गामाकोरोनावायरस और डेल्टाकोरोनावायरस पक्षियों और सूअरों में संक्रमण करने वाले वायरस के वंशज हैं।

हाल ही में WHO ने इसका नाम COVID-19 रखा:-

चीन के वूहान शहर से उत्पन्न होने वाला 2019 नोवेल कोरोनावायरस इसी समूह के वायरसों का एक उदहारण है, जिसका संक्रमण सन् 2019-20 काल में तेज़ी से उभरकर 2019–20 वुहान कोरोना वायरस प्रकोप के रूप में फैलता जा रहा है। हाल ही में WHO ने इसका नाम COVID-19 रखा।

वैक्सीन अनुसंधान:-

दुनिया भर के कई संगठन टीकों का विकास कर रहे हैं या ये कहे कि एंटीवायरल दवा का परीक्षण कर रहे हैं। चीन में, चीनी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीसीडीसी) ने नावेल कोरोनवायरस के खिलाफ टीके विकसित करना शुरू कर दिया है और निमोनिया के लिए मौजूदा दवा की प्रभावशीलता का परीक्षण कर रहा है।साथ ही, हांगकांग विश्वविद्यालय की एक टीम ने घोषणा किया है कि एक नया टीका विकसित किया गया है, लेकिन मनुष्यों पर क्लीनिकल ​​परीक्षण करने से पहले जानवरों पर परीक्षण किए जाने की आवश्यकता है। रूसी उपभोक्ता स्वास्थ्य वाचडॉग Rospotrebnadzor ने WHO की सिफारिशों को मानते हुए एक वैक्सीन का विकास शुरू किया।
पश्चिमी देशों में, संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) अप्रैल 2020 तक वैक्सीन के मानव परीक्षणों की उम्मीद कर रहा है, और कैम्ब्रिज-मैसाचुसेट्स आधारित मॉडेर्ना कंपनी CEPI के फंडिंग से mRNA टीका विकसित कर रहा है।

संक्रमित लोगों में ये लक्षण हो सकते हैं:-

बहती नाक
गले में खराश
खांसी
बुखार
सांस लेने में दिक्कत (गंभीर मामलों में)
कुछ मामलों में, यह रोग घातक भी हो सकता है. बुज़ुर्ग और ऐसे लोग जिन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे कि अस्थमा, डायबिटीज़ या दिल की बीमारी) हैं उनके लिए यह वायरस ज़्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

आप संक्रमण को होने से रोक सकते हैं, अगर आप:-

1. अल्कोहल वाले सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते हैं या साबुन और पानी से अक्सर अपने हाथ साफ़ करते हैं।
2.खांसने और छींकने के दौरान टिश्यू पेपर से या कोहनी को मोड़कर, अपनी नाक और मुंह को ढक रहे हैं।
3.ठंड या फ्लू जैसे लक्षणों वाले किसी भी व्यक्ति के साथ निकट संपर्क (1 मीटर या 3 फीट) से बचते हैं।
4. अगर आप में इस रोग के कुछ लक्षण हैं, तो पूरी तरह ठीक होने तक घर पर ही रहें।

आपको इन लक्षणों में राहत मिल सकती है, अगर आप:-

1. आराम करते हैं और सोते हैं
2. खुद को किसी तरह गर्म रखते हैं 3.गुनगुना पानी, तुलसी और गिलोय का काढ़ा, कॉफी आदि पीते हैं
4. खूब पानी या दूसरी तरल चीज़ें लेते हैं
5. गले की खराश और खांसी को कम करने के लिए, कमरे में ह्यूमिडिफ़ायर का इस्तेमाल करते हैं और गर्म पानी से नहाते हैं,।

भारत में कोरोनोवायरस के प्रकोप के कारण लगाया गया स्वेच्छा से जनता कर्फ्यू:-

जनता कर्फ्यू (Janata Curfew) जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू (अर्थात् निषेधाज्ञा) है। इस शब्दावली का सर्वप्रथम प्रयोग भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की जनता से आग्रह किया कि वे सभी आने वाले रविवार 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करें। जनता कर्फ्यू को उन्होने "जनता के लिए, जनता द्वारा, खुद पर लगाया गया कर्फ्यू" कहकर परिभाषित किया। 
जनता कर्फ्यू अंग्रेजी के लॉकडाउन से भिन्न है। जनता कर्फ्यू व्यक्ति पर अनिवार्य नहीं होता जबकि लॉकडाउन शासन द्वारा जनता पर आरोपित किया जाता है तथा जनता द्वारा इसका पालन करना अनिवार्य होता है।

जनता कर्फ्यू का स्वागत:-

वर्गों, विचारधाराओं की सारी सीमाओं को तोड़ते हुए पूरे देश ने प्रधानमन्त्री की इस पहल का एक मत से स्वागत किया। कई लोगों ने जनता कर्फ्यू को लगातार एक सप्ताह के लिए जारी रखने की इच्छा जताई। 22 मार्च की पूर्व सन्धया को विभिन्न टीवी चैनलों में चले संवादों में भी कई विद्वानों ने जनता कर्फ्यू को लगातार एक सप्ताह के लिए जारी रखने की बात को एक अत्यावश्यक कदम बताया। परन्तु वहीं, गरीब वर्ग के कई लोगों के लिए यह चिन्ता का कारण है कि लम्बे समय तक बिना कमाई के वे कैसे अपनी आजिविका चलाएंगे। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर जनता कर्फ्यू के लिए सिर्फ एक दिन का समय उचित माना गया।
22 मार्च, 2020 को जनता कर्फ्यू 14 घंटे के लिए रहा। पुलिस, चिकित्सा सेवाओं, मीडिया, होम डिलीवरी पेशेवरों और अग्निशामकों जैसी आवश्यक सेवाओं से सम्बन्धित लोगो को छोड़कर सभी को जनता कर्फ्यू में हिस्सा लेना आवश्यक है (परन्तु अनिवार्य नहीं)। 

शाम 5 बजे सेवाकर्मियों के लिए श्रद्धा की अभिव्यक्ति:-

जनता कर्फ्यू के साथ-साथ मोदी जी ने ठीक शाम 5:00 बजे सभी स्वास्थ्य एवं सेवाकर्मियों, योद्धाओं एवं पुलिस के सम्मान और हौसला बुलन्द करने के अपने घर के द्वार से ताली, घँटी, शँख बजाने का आव्हान भी किया।
शाम 5 बजते ही देश भर में थालियों, घंटियों तथा शंख की अवाज गूंजने लगी। अपने घरों के मुख्य द्वारों तथा बालकनियों पर खड़े होकर लोगों ने लगातार कई मिनटों तक ताली, थाली, घंटी तथा शंख बजाए। 
पूरे देश को एकजुट देख कई बहुत प्रफुल्लित थे तो कई बहुत भावुक भी हुए। सभी को भारतीय होने पर गर्व हो रहा था। 

भारत लॉक डाउन:-

पूरे विश्व के अतिविकसित देशों की स्थिति को देखते हुए 24 मार्च मंगलवार की रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने अपने संबोधन में कहा कि आज रात 12 बजे से पूरे देश में संपूर्ण लॉक डाउन होने जा रहा है। इस दौरान पीएम जनता कर्फ्यू के बाद कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए कड़े फैसले का एलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि इस दौरान सिर्फ एक और एक काम करें कि बस अपने घर में रहें। किसी सूरत में बाहर न निकलें। देश के हर राज्य को, हर केंद्र शासित प्रदेश को, हर जिले, हर गांव, हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले को अब लॉकडाउन किया जा रहा है। इन प्रयासों को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों की लापरवाही, कुछ लोगों की गलत सोच, आपको, आपके बच्चों को, आपके माता पिता को, आपके परिवार को, आपके दोस्तों को, पूरे देश को बहुत बड़ी मुश्किल में झोंक देगी। 
कोरोना को फैलने से रोकने के लिए अगर हम लोग सोशल दूरी बनाकर रखेंगे या बाहर कम निकलेंगे और दूसरों के संपर्क में नहीं आएंगे तो कोरोना वायरस फैलने का खतरा बहुत कम हो जाएगा।

कोरोना के कारण भारत में 21 दिन का लॉकडाउन बहुत जरूरी है क्योंकि:-

भारत में होता है ये सब?

1. आस्था के नाम पर लंगर, भंडारा, प्रसादी में अस्वच्छता और भीड़भाड़, भगदड़ सही है?
2. विवाह आदि परिवारक समारोहों का संक्षिप्तीकरण जो आर्थिक विषमता को भी परिलक्षित करता है, ईर्ष्या, द्वेष और प्रतिद्वंद्विता को भी बढ़ावा नहीं देता ?
3. धार्मिक स्थलों का तेजी से निर्माण केवल पत्तरों पर नाम टंकित करवाने के लिए?
4. क्या अस्पतालों, स्कूलों और व्यवस्थित यातायात और सड़क निर्माण से आवश्यक है आम सभाएं, मंदिरों के शिलाविन्यास और लोगों की आस्था से खिलवाड़?
5. देश घूम न पाए अडोस-पड़ोस से वैमनस्य है लेकिन स्टेटस के चलते विदेश भ्रमण आम बात हो गई है क्या यही पैसा देश के पर्यटन व्यवसाय को सुदृढ़ करने हेतु काम नही आता?
6. खुद को हिन्दू कहने वाले माँस-मदिरा, जुआ-सट्टा, कालाबाज़ारी और कालाधन लेकर सफेदपोश रहकर खुद से नज़र मिला पाते हैं?
7. खुद से ज्यादा दूसरों की जिंदगी में रुचि रखने वाले लोग क्या खुद पर, खुद के परिवार पर ध्यान दे पाते हैं, सामंजस्य बिठा पाते हैं??
---------कतई नहीं-------

"मानव को प्रकृति ने दी है चेतावनी"

ये इक्कीस दिन बहुत महत्पूर्ण है भारत में सोशल डिस्टेंसिंग के लिए क्योंकि 21 दिन लॉकडाउन के बीच 15 दिन पड़ रहे है बड़े त्योहार हैं।
-25 मार्च बुधवार गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, घटस्थापना, भगवान झुलेलाल जयंती
-26 मार्च गुरुवार- चेटी चंड
-27 मार्च शुक्रवार- गणगौर तीज व्रत, मत्स्यावतार जयंती
-28 मार्च शनिवार- मासिक विनायक चतुर्थी
- 1 अप्रैल बुधवार- दुर्गा महाष्टमी
- 2 अप्रैल गुरुवार- राम नवमी, दुर्गा महानवमी
- 3 अप्रैल शुक्रवार- चैत्र नवरात्रि पारणा
- 4 अप्रैल शनिवार- कामदा एकादशी
- 5 अप्रैल रविवार- प्रदोष व्रत (शुक्ल पक्ष)
- 8 अप्रैल बुधवार- हनुमान जयंती
- 10 अप्रैल शुक्रवार- गुड फ्राईडे
- 11 अप्रैल शनिवार- संकष्टी चतुर्थी
- 12 अप्रैल रविवार- गुरु तेगबहादुर जयंती
- 13 अप्रैल सोमवार- मेष संक्रांति, कंवरराम जयंती
- 14 अप्रैल मंगलवार- डॉ.भीमराव अंबेडकर जयंती
इन सब त्योहारों में बहुत भीड़ रहती है जिससे कोरोना वायरस फैलने का डर रहेगा।

आप यथाशक्ति दान-धर्म करना चाहते हैं?

1. मानवता कायम रखें।
2. रोटी, कपड़ा और आवास का दान दें।
3. शिक्षा, कला, विशिष्टताओं को विस्तार दें।
4. मंदिरों की बजाय अस्पतालों एवं शिक्षालयों का निर्माण करवाएं।
5. जूठन न छोड़ें।
6. जरूरतमंदों की सहायता करें।
7. अनाथ बच्चों, वृद्धों और वृक्षों को संरक्षण दें।
8. साक्षरता, स्वच्छता, स्वपोषण, संस्कृति, संस्कार, स्वावलंबन, सक्षमीकरण के प्रति जागरूकता फैलाएं, रोजगार के अवसर प्रदान करें।
9. प्रवचनकर्ताओं, बाबागिरी, मठाधीशों और भ्रष्टाचारियों से दूर रहें।
10. जो बातें अमल कर सकते हैं वही कहें।

गलतफहमी:-

कुछ लोग इस गलतफहमी में हैं कि सोशल डिस्‍टेंसिंग केवल बीमार लोगों के लिए आवश्यक है। ये सोचना सही नहीं कि सोशल डिस्‍टेंसिंग हर नागरिक के लिए है, हर परिवार के लिए है, परिवार के हर सदस्य के लिए है।  पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा। कोरोना से प्रभावित रहे चीन, अमेरिका, इटली, ईरान आदि देशों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन सभी देशों के दो महीनों के अध्ययन से जो निष्कर्ष निकल रहा है, और एक्सपर्ट्स भी यही कह रहे हैं कि कोरोना से प्रभावी मुकाबले के लिए एकमात्र विकल्प है सामजिक दूरी। समाज के लोग एक दूसरे से अलग-थलग रहेंगे तो यह बीमारी भी उनसे दूर रहेगी।

वायरस से दूर और खुद के करीब लाती है सोशल डिस्टेंसिंग:-

कुछ फायदे:-

1. खुद के साथ समय बिताने का मौका: रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही किसी को वक्त मिल पाता हो कि वह खुद से बात से बात करे और अपना मूल्यांकन करे। ऐसा कई मनोचिकित्सक भी मानते हैं कि खुद से बात करना इंसान के लिए बहुत जरूरी होता है।
2. पूरी कर सकते हैं शौक: सोशल डिस्टेंसिंग के दौरान जो वक्त आपको अपने लिए मिलता है, उसमें आप अपनी उन हॉबीज को पूरा कर सकते हैं जो व्यस्त जिंदगी के चलते कहीं पीछे छूट गई थी।
3. जो पल पीछे छूट रहे थे: हममें से कई लोग हैं जो बिजी होने के नाते अपने बच्चों के बचपन के उन कीमती पलों को मिस करते हैं जो लौटकर दोबारा नहीं आएंगे। तो इन दिनों में आप अपने बच्चों के साथ उन मस्तीभरे पलों को जी सकते हैं। इससे जहां आपका मन तरोताजा होगा, तो वहीं बच्चों के साथ खेलकर आपके शरीर में भी फुर्ती आ जाएगी।
4. वारयस से भी दूरी: सोशल डिस्टेंसिंग में आप किसी शख्स से कम से कम तीन मीटर तक दूर रहते हैं और हाथ वगैरह भी नहीं मिलाते हैं। तो किसी से वायरस तो क्या, किसी के शरीर के जर्म्स तक आप तक नहीं पहुंचते हैं।

इंफेक्शन कम फैले और बीमारी थम जाए, इसलिए एक-दूसरे से कम संपर्क रखने को ही सोशल दूरी कहा जाता है। बहुत सारे लोगों का एक साथ जमा होना, कोई बिल्डिंग बंद करने और प्रोग्राम कैंसल करना भी इसी का हिस्सा है। कोरोना वायरस को रोकने के लिए सोशल दूरी बहुत जरूरी है।

हम प्रकृति को छेड़ते रहते हैं उसके स्वभाव के विपरीत
प्रकृति ने दी है सजा अकेले में समय रहा है बीत
अब भी जो हम न समझे तो चुग जाएगी चिड़िया खेत
मानवता हारेगी और एक वायरस की हो जाएगी जीत।

डॉ प्रीति समकित सुराना

Wednesday, 25 March 2020

छोड़ देना अच्छा है

#जो आपको बार-बार ये महसूस करवाए

कि उसके बिना आपका अस्तित्व शून्य है
तो तत्काल उसका साथ छोड़ देना अच्छा है,..!
क्योंकि
आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा वही देगा
जिसके साथ आप खुद को
सुरक्षित और आशान्वित महसूस करते हैं
जो आपको आपके होने को महसूस करवाए
आपके होने को खुद के होने से अधिक महत्व दे,..!
सच कहूँ
तो मुझे लगता है
वो वही हो सकता है जो आपसे प्रेम करता है
और आपके लिए कुछ भी कर सकता है,..!
क्योंकि
ठीक विपरीत जिससे आप प्यार करते हो
उसके लिए खुद को अस्तित्वविहीन कर सकते हो,..!
प्रेम की सार्थकता तभी है
जब प्रेम दोनों को हो
तभी एक दूसरे का सम्मान भी दोनों करेंगे,
एक तरफा प्रेम हो तो सकता है
पर वास्तविक प्रेम में
तप और त्याग की भावना
दोनों में हो ये अनिवार्य है,..!
सुनो!
मुझे तुमसे प्रेम है
और
तुम्हें???

#डॉप्रीति समकित सुराना

कठिन समय है कठिन तपस्या

कठिन समय है कठिन तपस्या
पर
समझना होगा सभी को
खास बनने के लिए
हीरे को कटना पड़ता है
सोने-चांदी को गलना पड़ता है
लोहे को अपनों के हाथों ही पिटना पड़ता है
जब जाकर शक्ल लेते हैं ये सब
कोहिनूर, आभूषण या किसी सुंदर पात्र के,..
हे दुर्गा!
तुम दुर्गा यूँही नहीं बनी
ये तप और तपस्या का परिणाम है
कि सृष्टि की रक्षा के लिए
स्वयं त्रिदेव 
और दैवीय शक्तियों ने तुम्हे गढ़ा है,..!

शत-शत नमन,कोटिशः वंदन🙏🏼

हिन्दू नववर्ष की 
सभी को ढेर सारी बधाइयाँ
नववर्ष सारी परीक्षाओं के 
सुखद परिणाम लेकर आए।

डॉ प्रीति समकित सुराना