प्रिय प्रीति,
ढेर सारा स्नेह
(जो तुम डिज़र्व करती हो)
मैं जानती हूँ तुम अभी कहोगी कि नहीं चाहिए मुझे प्यार, खुशी, मुस्कान क्योंकि तुमने बचपन से अपने भीतर एक डर पाल रखा है कि हर प्रिय चीज, व्यक्ति या भाव कुछ पल की खुशी के बाद ढेर सारे ऑंसू देकर जाते हैं।
अरे बाबा याद करो वो दूरदर्शन के जमाने का एक एड 'अब तो बड़े बन जाइये' तुम्हे बेहद पसंद था, तो मेरी जान तुम कब बड़ी होओगी। निकालो खुद को डर से बाहर और जी लो अपनी जिंदगी, क्या हुआ जो खुशी के लम्हे छोटे होते हैं, पर एक लंबा सफर उन लम्हों की यादों में गुजरना बहुत खूबसूरत होता है। बेशक आँसुओं की अहमियत कम नहीं है जीवन में, रखो साथ उन्हें भी अपने जीवन के सफर में। ताकि खुशी के लम्हों में याद रख सको कि ये समय भी गुजर जाएगा इसलिए सामान्य बनी रहो और दुख में ये समझ सको की खुशी नहीं रही तो गम भी नहीं रहेगा।
वैसे मैं तुम्हें बता दूँ तुमने बहुत हिम्मत से बीमारियों से घिरे शरीर को जिस तरह सबकी खुशियों के लिए भूलकर स्वस्थ मन को अपना साधन बनाया है वह तुम्हें साध्य तक पहुंचने में बहुत बड़ा सहयोगी बनेगा। बस ध्यान रहे कि तुमने खुद से किया था वादा कि जो कहोगी वो करके दिखाओगी, कथनी और करनी हमेशा एक रहेगी तो इस वादे को जरूर निभाना ताकि अपनों का विश्वास कायम रख सको।
तुम जब तक अपने नियमानुसार दिन में किसी न किसी की एक मुस्कान की वजह बनती रहोगी तब तक तुम्हारे ऑंसू पोंछने वाले हाथ कम नहीं होंगे। हमेशा याद रखना समय हर घाव भरता है और सबक के रूप में निशान छोड़ जाता है। तुम्हें गलतियों से सीखना है गलतियों को दोहराना गलती नहीं बल्कि गुनाह बन जाता है अतः बचना गलतियों के दोहराव से।
एक और बात जो मैं अक्सर तुम्हें समझाना चाहती हूँ कि मरने कि नहीं जीने की बातें किया करो, जिन्हें एक धागे में पिरोकर तुमने परिवार और रिश्तों के बंधन में पिरोया है उनका जुड़े रहना तुम्हारी मजबूती पर टिका है। निराश होती हो, टूटती हो तब याद रखा करो कि गैरों के लिए ऑंसू बहाता देख तुम्हारे अपने दुखी होते हैं।
तुमने साहित्य और महिला सक्षमीकरण को उद्देश्य बनाया है तो तुम्हे अपने शरीर और मन का पहले से ज्यादा खयाल रखना होगा क्योंकि तुम उन्हें निराश कतई नहीं कर सकती जिनकी खुशियाँ तुमसे जुड़ी हैं।
तुम्हारे बच्चे और सच्चा जीवनसाथी तुम्हारा भविष्य हैं, एक दोस्त की तरह तुमने उनकी परवरिश की है तो यकीन करो कि आने वाला कल उनकी वजह से और बेहतर जी सकोगी। सबसे प्यार करके सबसे प्यार पाने की अपेक्षा तुम्हें हमेशा रहती है पर तुम अपेक्षाएँ मत रखो क्योंकि समय और नसीब से सबकुछ मिलेगा, कई बार जो आपसे प्यार करते हैं उनका जताने के तरीका अलग हो सकता है पर उसे उपेक्षा समझ कर आंखों में आँसू मत आने दिया करो क्योंकि तुम्हारी आँखों मे आँसुओं से मुझे दर्द होता है। खूब बढ़ो, हमेशा सबकी खुशियों की वजह बनो, अपनों के लिए अपना ख्याल रखो। तुम्हारे सारे स्वप्न पूरे हों, तुम्हारे लिए ढेर सारे प्यार के साथ मेरी ढेर सारी दुआएँ।
खुद से प्यार करना कभी मत छोड़ना। हमेशा तुम्हारे प्यार की आकांक्षी,...!
तुम्हारी प्रीत
#डॉ. प्रीति समकित सुराना



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