तुमने भी महसूस की थी
बढ़ती हुई दूरियां
हमारे दरमियां
और बिना कुछ भी सोचे-समझे
तुमने पूछा एक सवाल
विश्वास कमजोर हो गया न?
और बस उसी पल
तन-मन-धन-जन से जुड़ी
हर बात दरकिनार हो गई,
शेष रहा हमारे दरमियां अविश्वास,
तुम्हारे पास मुझे जाने-समझे बिना किये गए सवाल,
और मेरे पास
मेरा टूटकर कमजोर पड़ा मेरा आत्मविश्वास!
सुनो!
किस बात की सज़ा है ये?
सोचकर जवाब देना,
मेरी सांसों के उखड़ने से पहले!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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