दुनिया बाद से बदतर हो रही है
पर संवेदनाएं जिंदा है
आज भी
जो संवेदनाएं न होती
तो
दूर रहकर
साथ रहने की
जीने के लिए
अपनों का खयाल रखने की
सुरक्षा के लिए सावधानी की
जरूरत ही न होती
तसल्ली है
मानवीय संवेदनाओं के जिंदा होने की,..!
शुक्रिया मानवों मानवीयता को जीवित रखने के लिए!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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