तुम सचमुच अतिप्रिय ही मुझे
भीड़ में भी तुमने मुझे
कभी अकेला नहीं छोड़ा
जबकि
अकसर साथ दिखने वाले
साथ होकर भी नहीं होते साथ
सच कहूँ
तो किसी के साथ दुखावे कि हँसी से
कहीं सच्चे हैं
तुम्हारे पहलू में मेरे ऑंसू!
शुक्रगुज़ार हूँ दिल से तुम्हारी
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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