बाहों के झूले में झूल,
जाऊं पीड़ा सारी भूल।
बातों में कड़वाहट आज,
बातों को क्यों देना तूल।
अपनों से छल कैसा यार,
मत डालो आँखों में धूल।
आज अगर सूखा है चमन,
कल भी खिल सकते हैं फूल।
समझो तो रखना यह याद,
जीवित रखना हरदम मूल।
सच की ही होती है जीत,
कितने चुभते सच को शूल।
तुम हो मुझसे कितने दूर,
'प्रीत' हिया में उठते हूल।
डॉप्रीतिसमकितसुराना



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