रामराज्य: मेरी नज़र में पुस्तक के रुप में सार्थक चिंतन की विषय वस्तु एवं मार्गदर्शक।
लेखक: आशुतोष राना
प्रकाशक: कौटिल्य बुक्स
मूल्य: 500/-
किसी भी चरित्र को समझना दृष्टिकोण का परिणाम होता है। एक ही व्यक्ति को अलग-अलग लोग अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते, समझते, मानते और परिभाषित करते हैं।
विगत तीन दिनों से 'रामराज्य' के 320 पेज एक बार में पढ़ लिए, वजह केवल ये की आशुतोष राना जी की शैली धाराप्रवाह है, हर दृष्टांत के अंत में नए अध्याय को पढ़ने की जिज्ञासा स्वतः ही जागृत हो जाती है।
बचपन से रामायण के पात्रों कैकेयी, शूर्पणखा, हनुमान, कुम्भकर्ण, विभीषण, रावण, पंचवटी, लंका, अयोध्या, लक्ष्मण, भारत, सीता और राम के साथ अनेक पात्रों की एक छवि मन में बसी हुई है। इस उपन्यास को पढ़ते हुए गढ़ी हुई छवि आशुतोष राना जी की विशेषता 'समग्र के दृष्टिकोण' से नए रूप में निखर कर आई।
आशुतोष जी का जीवंत चित्रण करने का अंदाज मन को मोहता है, जितनी उनकी आवाज़ और आँखें चुम्बकीय है उतनी ही आकर्षक उनकी लेखन शैली भी है। सामने बैठ कर बात करते हुए यूँ लगता है जैसे उनकी आवाज़ कहीं गहराई से निकलकर आ रही हो और उसे उनकी आँखें दोहरा रही हो। यही तालमेल उनके भावों, शब्दों और लेखनी में भी महसूस होता है। यथार्थ यह है कि दृष्टिकोण का व्यापक होना और शब्दों में चित्रण की क्षमता का होना लेखन को बहुत गहन बनाता है।
इस पुस्तक की विशेषता ये भी है कि नए शब्दों को अर्थ सहित पाठकों को परोसा गया है जिससे अध्ययन की क्षुधा तृप्त होती है क्योंकि बात उन्ही अर्थों में मन तक पहुंचती है जिन अर्थों के साथ कही गई है अन्यथा शब्दों के अर्थ बदलने से भाव लेखक की बात को यथावत पाठक तक संप्रेषित नहीं कर पाते।
आशुतोष राना जी को इस अद्भुत कृति के लिए खूब सारी बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएँ, लेखन की यात्रा सतत चलती रहे। मेरा नमन आपके यश की कामना के साथ स्वीकार करें।
शुभेच्छु
डॉ प्रीति समकित सुराना
संस्थापक
अन्तराशब्दशक्ति
वारासिवनी (मप्र)
9424765259
21/06/2020



लेखक को बधाई
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