Monday, 15 June 2020

रात की रहगुज़र पर

सुनो!
हम-तुम
मुसाफ़िर हैं
ठहरना नहीं है हमें
रात की रहगुज़र पर
क्योंकि
मंज़िल तो सहर पर है
और
याद रहे
रात कितनी भी काली क्यों न हो
सुबह होती जरुर है,..!

इसलिए
रुक जाना नहीं, 
तू कहीं हार के, राही ओ राही!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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