Monday, 15 June 2020

चाहा था पर हुआ क्या?


चाहा था
लम्हों को महसूस करना
मुठ्ठी में कैद करना
और महसूस करते हुए
हर लम्हे को जीना
और हुआ
ये
कि रेत की तरह
मेरी मुट्ठी से फिसल गए लम्हे
महसूस करने के पहले
जिंदा तो हूँ
पर मुझमें अब वो बात नहीं!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment