Tuesday, 16 June 2020

था कभी



था कभी
मेरा भी ख्वाब
सबको खुश रखने का
पर
कड़वा सच सिर्फ इतना है
खुश कोई तभी तक रहेगा मुझसे
जब तक स्वार्थसिद्ध होता रहे
निःस्वार्थ रिश्ते
अब मुझे भी किताबी लगने लगे हैं
नकारात्मक परिणाम कर्तव्यों के निर्वाह के
हमेशा निराशाजनक ही होते हैं
और तब बेमानी लगते हैं 
सारे सिद्धांत और आदर्श!

रिश्ते, नाते, प्यार, वफ़ा, सब 
बातें हैं बातों का क्या?
सच
था कभी यकीन मुझे भी 👆🏼इन बातों पर😒

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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