Thursday, 25 June 2020

जाने दो

मैं बीज थी
अंकुरित तभी होती
जब रोपीं जाती
जब लोग रौंदने लगे
सपने मेरे
तब किया था तय
कि
जाने दो,..!
रौंदा जाना भी 
रोपण का एक तरीका होता है
लोगों ने कुचला न होता 
तो मैं मिट्टी में न मिलती
और मैं मिट्टी में न मिलती
तो रोपण, अंकुरण, संवर्धन से 
पुष्पित और फलित होने से वंचित रह जाती।
आभार उन सभी का जिन्होंने
मुझे पनपने का सौभाग्य दिया।

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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