अपनी जगह पर
मेरे दिल में लहू है ये तय है
क्योंकि खौलता है तब
गर्ममिज़ाज मैं सीने में महसूसती हूँ,
लोगों की मक्कारियों पर,..!
दिल धड़कता भी है जोर से
थोड़ी सी रुमानी मैं
सुनती हूँ उनमें धीमे-धीमे,
तुम्हारा नाम खुशगवारियों पर,..!
दिल टीसता भी है बहुत तीखा सा
धड़कता, उबलता, टीसता दिल
अहसास दिलाता है रो-रोकर
अहसाह के होने का दुश्वारियों पर,...!
सुनो!
आज अभी इस वक्त जब ये लिख रहीं हूँ
हूँ तरबतर पसीने से टीसते दिल के साथ
मैं न रहूँ तब भी सब कुछ रखना अपनी जगह पर,
माफ करना मुझे मेरी नादानियों पर,...!
मिले, मिलेंगे, मिलते रहेंगे
लहू दौड़ता रहा तो चलती जिंगदी में
दौरा थम गया लहू का तो हिस्सेदार रखना,
अपने किस्से कहानियों पर,...!
पास रहूँ न रहूँ,..
साथ रहूँगी साये सी उम्रभर,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



बहुत बढ़िया
ReplyDeletedhnywad
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