जब कोई पीड़ा हो
तो मुँह से माँ निकलता है
पर आंखों में चेहरा जिसका होता है
वो हैं पापा
गोद में सिर रखकर
राहत की चाह के लिए माँ चाहिए
पर उंगली थामकर जब कठिन डगर में
सहारा चाहिए हो तो
आज भी मुझे चाहिए होते हैं पापा
घर-गृहस्थी, परिवार-समाज की बातें
जब भी साझा करना हो तो माँ को ही फोन लगाती हूँ,
पर जब भी किसी मुश्किल का हल ढूंढती हूँ
तो माँ को तकलीफ न हो इसलिए खुद-ब-खुद
कीपैड पर जिन नंबरों पर उंगलियाँ चलती हैं
वो नंबर जिसका होता है वो हैं पापा
सच ये है कि
माँ की ममता और पापा का आसरा आज भी जरूरी है
जबकि आज हम भी बन चुके हैं माँ-पापा।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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