स्वर्ण सीढ़ी का स्वर्णिम अवसर
भाग्य से ही मिलता है
परिवार रूपी बगिया में पड़पौत्र
पुष्प बनकर खिलता है
बिदामीबाई के कुलगौरव
"सोनराजजी और जेठीबाई"
जिनकी वंश परंपरा
धरम-सुनीता ने आगे बढ़ाई
संकेत-स्वर्णा की गोद में
सिद्धम ने जब जन्म लिया
इस परिवार को खुशियों का
यह महान अवसर दिया
गोलछा परिवार में यह
अनुपम अवसर आया है
स्वर्णसीढ़ी समारोह में
सबका मन हर्षाया है।
सभी मिलकर करते दुआ
मिले बड़ों का आशीर्वाद
आज स्वर्ण, कल हीरक सीढ़ी
करे गोलछा परिवार आबाद।



सुन्दर रचना
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