Sunday, 28 June 2020

वतन की मिट्टी



मुट्ठी भर मिट्टी में समाहित हैं अनगिनत कण,
एक सीमा में चंद सैनिक और व्यर्थ का रण,
हर एक सैनिक से जुड़े देश और तनमनधन,
विनाश की कल्पना से भी सिहर जाता है मन।

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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