सुनो!
मैंने अपने हिस्से की नेकी
कर डाली
जी भर
पूरी ईमानदारी से,..!
मन से तैयार भी थी
नेकी करके कुएं में डालने के बाद भी
जूते खाने को,..
ये कलियुग है यार
एक ही भलाई की सजा एक नहीं होती
फिर सोचो क्या होता होगा उनका
जो सदा करते हैं परोपकार
कैसा विचित्र यह संसार
किसी की जीत में किसी की हार!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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