Tuesday, 19 May 2020

लिखते हैं, मिटाते हैं!

दिल में कई-कई बाते हैं, मुश्किल से जिसे छुपाते हैं...!

दर्द भी होता है थोड़ा, थोड़ी टीस भी होती है,
लेकिन हल इस मुश्किल का, है मौन सही हम पाते हैं,
दिल में कई-कई बाते हैं, मुश्किल से जिसे छुपाते हैं,..!

जब तक धीरज रख सकते हैं, तब तक तो हँस लेते हैं,
जब सब्र नहीं कर पाते तब, ऑंसू ही काम आते हैं,
दिल में कई-कई बाते हैं, मुश्किल से जिसे छुपाते हैं,..!

खैर छोड़ो, सब जाने दो, समझ नहीं तुम पाओगे,
तुमको जो सुनना भाता है, चलो वही कहते सुनाते हैं,
दिल में कई-कई बाते हैं, मुश्किल से जिसे छुपाते हैं,..!

सहना ही होता है सबको, खुद ही दर्द खुद के हिस्से का, 
तुमसे कोई गिला नहीं है, यूँ ही लिखते हैं-मिटाते हैं,
दिल में कई-कई बाते हैं, मुश्किल से जिसे छुपाते हैं,..!

डॉ प्रीति समकित सुराना

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