Wednesday, 20 May 2020

लगन



यहाँ वहाँ की बातें भूलकर
कर्म में मन ये मगन हो।

कर्म है सबसे सुंदर गहना
मानो व्यस्त हाथों में कंगन हो।

साथ रहे तो जग ये स्वर्ग सा 
जैसे क्षितिज पर धरा गगन हो।

तपकर होता जाए खरा 
कुंदन जैसा ही जीवन हो।

व्यवहार, और वाणी संयमित
सुखद सा वातावरण हो।

हर सपना पूरा होता है
यदि मन में थोड़ी लगन हो।

डॉ प्रीति समकित सुराना

0 comments:

Post a Comment