यहाँ वहाँ की बातें भूलकर
कर्म में मन ये मगन हो।
कर्म है सबसे सुंदर गहना
मानो व्यस्त हाथों में कंगन हो।
साथ रहे तो जग ये स्वर्ग सा
जैसे क्षितिज पर धरा गगन हो।
तपकर होता जाए खरा
कुंदन जैसा ही जीवन हो।
व्यवहार, और वाणी संयमित
सुखद सा वातावरण हो।
हर सपना पूरा होता है
यदि मन में थोड़ी लगन हो।
डॉ प्रीति समकित सुराना



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