सांस सांस हो प्रतीत
रगों में बहे संगीत
लिख कोई ऐसा गीत
ओ मेरे मनमीत
प्रीत नहीं राजनीत
कर जरा बातचीत
सुन मेरी हार जीत
ओ मेरे मनमीत
जानूं न मैं रीतनीत
काल से न भयभीत
जीवन रहा है बीत
ओ मेरे मनमीत
झूठी नहीं मेरी प्रीत
मानी हार तेरी जीत
प्रीत मेरी है पुनीत
ओ मेरे मनमीत,..प्रीति सुराना



0 comments:
Post a Comment