कहती हूँ मैं
बार-बार
तकरार में,
परवाह में,
प्यार में,
गुस्से में,
आँखों से,
स्पर्श से,
मजाक में,
गंभीरता से,
स्वस्थता में,
अस्वस्थता में,
हर हाँ/नहीं
और
हर है/नहीं है में जो बात
हाँ!
मुझे उस पल का हमेशा से इंतज़ार है,..
कभी तुम भी तो कहो न!
प्यार है, प्यार है, प्यार है!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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