Sunday, 3 May 2020

डर (मिनी कहानी)

अरे! मोहित, तुमने तो बिल्कुल ही चौक पर आना छोड़ दिया। यार महामारी तो कब की जा चुकी। इस तरह कब तक घर में दुबके रहोगे?
     नहीं दोस्त, बात महामारी के डर से दुबके रहने का नहीं है। इस महामारी में पापा के जाने के बाद, माँ की न टूटने वाली उदासी का है। 
      डर किसी और या नहीं अकेलेपन का है। आज माँ को अकेला छोड़कर घूमने निकल जाऊंगा पर माँ को अकेलापन लील जाएगा तो मैं किसके लिए जियूँगा। 
        इतना कहकर मोहित अपने घर की गली की ओर मुड़ गया और सारे दोस्त निःशब्द खड़े उसे जाता देखते रहे, बिल्कुल डरे हुए से,..!

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

0 comments:

Post a Comment