कोशिश (एक कहानी)
सीमा की बरसों से चाह थी कि जिस गांव में वो रहती है उसके लिए कुछ ऐसा कर जाए कि उसके बाद भी लोग उसे याद रखें।
उसने एक बोर खुदवाया बिल्कुल बाहर घर के ईशान कोण पर और उसकी मोटर का कनेक्शन अपने ही घर के मीटर से करवा दिया। उसका नल ऐसा लगवाया जैसे गैस गीज़र के नल को चालू करते ही गैस का लाइटर जल जाता है और बन्द करते ही बन्द हो जाता है, ठीक वैसे ही उस नल के चालू होते ही मीटर के साथ जुड़ा स्विच चालू हो जाता था और बन्द करते ही बन्द।
क्योंकि मीटर उसकी दुकान के भीतर कोने में लगा था लोगों को ये विज्ञान समझ मे ही नहीं आता था क्योंकि सारी फीटिंग, अंडरग्राउंड थी।
पूरे गांव में हल्ला हो गया कि अजूबा हो गया। हमारे मोहल्ले में एक ऐसा पानी का स्रोत है जो बन्द ही नहीं होता।
एक दिन बिजली विभाग ने लोड सैटिंग के लिए दिन भर बिजली की सप्लाई नहीं की। सब को लगने लगा नल का चमत्कार खत्म हो गया।
सब की निराशा देखकर उनके बेटे ने लोगों को बताया कि माँ बिना किसी से कुछ कहे या नाम प्रकट किए बिना जलसेवा करना चाहती थी इसलिए बोर, अंडरग्राउंड बिजली फिटिंग और मैग्नेटिक नल लगवाया जिसके चालू होते की मोटर चालू हो जाती थी और बन्द होते ही बन्द।
ये माँ की एक छोटी सी कोशिश थी जो वह निस्वार्थ और आजीवन करेंगी, माफी चाहते हैं और बिजली के कारण रुकावट का निदान भी शीघ्र ही करने की कोशिश करेंगे।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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