अपने अंदर झांक के देखा
करने लगी हूँ प्रेम की अपेक्षा
होने लगी है साथ की लालसा
बढ़ने लगी है मन की जिज्ञासा
देखने लगी थी बाहरी तमाशा
तभी
अंतर्मन ने झकझोरा
तब जाकर
अपने अंदर झांक के देखा
बहुत जरूरी था यह आत्मावलोकन
कई दिनों से
महसूस कर रही हूँ
बढ़ती ही जा रही है
मेरे भीतर की बुराइयाँ।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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