सुख के मोती है अनमोल
दुख तो मिलता है बेमोल
कुछ और मुफ्त नहीं मिलता
अपने मन की आँखें खोल
कर्म के भी खाते चलते हैं
केवल सुख ही लेना मोल
पैसे की जो धाक जमाते
उनके ढोल में होते पोल
खुद का दिया ही वापस आता
क्योंकि ये दुनिया है गोल
मन बिगड़ा तो सब बिगड़ेगा
नफरत का तू विष न घोल
जीवन एक व्यापार है यारों
इसमें है पल-पल में झोल।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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