Tuesday, 28 April 2020

अपने काम से काम रखो

अपने काम से काम रखो

अपने निर्णय में कोई बेवजह दखल देता था तो चिढ़ होती थी,
अच्छी नीयत से काम पर भी टोक देता था तो आंखें रोती थी,
कुछ अपनी इस पीड़ा से सीखा और बीते कुछ अध्याय पढ़े,
अपने काम से काम रखने वालों की ही सच में इज्जत होती थी।

डॉ प्रीति समकित सुराना

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