अपने काम से काम रखो
अपने निर्णय में कोई बेवजह दखल देता था तो चिढ़ होती थी,
अच्छी नीयत से काम पर भी टोक देता था तो आंखें रोती थी,
कुछ अपनी इस पीड़ा से सीखा और बीते कुछ अध्याय पढ़े,
अपने काम से काम रखने वालों की ही सच में इज्जत होती थी।
डॉ प्रीति समकित सुराना



0 comments:
Post a Comment