दर्द है,
बहुत है,
असहनीय भी कह सकते हो,..!
पर पी रही हूँ ऑंसू,
मुस्कुराती भी हूँ,
पागल भी कह सकते हो,..!
रोती हूँ अकेले में,
अब नहीं बाँटती दर्द,
एक धोखे ने तोड़ दिये यकीन सारे,..!
जिंदा हूँ सपनों और अपनों के लिए
जिंदादिली से जीती हूँ
कैसे कर पाती हूँ ये सब,
मेरे अपने हालात की बात है,
तोड़ नहीं पाये या टूटी नहीं मैं,
ये राज़ की बात है!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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