एक रिश्ता
जिसे निभाते हैं
दो लोग
दो पक्ष
दो सोच
दो अधिकारी
दो उत्तरदायी
दो दिल
दो दिमाग
एक साथ, एक दूसरे के लिए
उस रिश्ते के लिए बरती ईमानदारी
मैंने वो किया
मुझसे जो हो सकता था
अब तुम्हारी बारी
हाँ!
कड़वा किन्तु सत्य
ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती
पर गलतियों का ठीकरा
कैसे भी
कभी भी
किसी पर भी
किसी भी नीयत से
फोड़ा जा सकता है
एक हाथ से भी अगर ठान लो
कि बिखराव ही लक्ष्य है।
कर सकते हो तुमसे जो हो सकता है
है न!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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