ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है
कि यदि आप
अपनी बात कहना चाहते हैं
तो
उससे पहले आपको
सुनने की आदत डालनी होगी
क्योंकि
ये तय है
आप कहेंगे तो
सवाल भी उठेंगे
आक्षेप भी लगेंगे
अपेक्षाएं भी होगी
विवाद की संभावनाएं भी होंगी।
डॉ प्रीति समकित सुराना
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