Friday, 23 February 2018

आहत

हाँ!
आहत हूँ आज
बहुत आहत
और मन है
बेहद अनमना सा,..
जाने क्यों
नहीं सहा जाता
हमारे बीच दुराव-छिपाव
या कोई छोटा सा भी झूठ
वो भी व्यर्थ की बातों में,
अपनी लापरवाहियों को
छुपाने के लिए,...
जहाँ सच बोलकर झगड़ना
झूठ बोलकर बढ़ने वाली दूरियों से
कहीं बेहतर हो सकता है,..
पर अनायास
ये बेवजह की बातें
दुखा जाती है नाजुक सा मन,
कुछ कचोटता है भीतर
अनवरत
पर टूटता नहीं
एक अटूट आस्था सा
मेरा तुम पर विश्वास,...
जाने क्यों?

ये भी प्यार ही है न?

प्रीति सुराना

1 comment:

  1. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' २६ फरवरी २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीय माड़भूषि रंगराज अयंगर जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।

    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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