Sunday, 24 April 2016

आज़ादी का दीवाना

आज़ाद था नाम और,आज़ादी एक लक्ष्य था,
कांपते शत्रु  जिससे  , ऐसा  जोश  था  खरा ।

अत्याचारी अंग्रेजों    के,कानों में बम फोड़े थे,
लाला जी की हत्या हुई ,वो ही   रोष था भरा ।

क्रांतिकारियों के संग,काकोरी अंजाम दिया,
लूट खजाना गोरों का, शीश  दोष  था  धरा।

मां   भारती    पे  हंसके,जान अपनी वार दी,
आज़ाद    ने   देश   हेतु, रण घोष  था करा ।
 
प्रीति सुराना

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