Tuesday, 22 July 2014

रहने दो,...


मेरे चेहरे पर हंसी का नकाब रहने दो,

अभी इन आंसुओं का हिसाब रहने दो,

सवाल न बदले हैं न बदलेंगे ज़माने के,

मेरी आंखों में छुपे कुछ जवाब रहने दो,...प्रीति सुराना

7 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 24/07/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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