Friday, 20 June 2014

मन दहल जाता है,...

हां !

अब तो 
गम की आदत सी हो गई है 
खुशियों की आहट भी हो 
तो डर सा लगता है

क्यूंकि वक्त ने अपनी ठोकरों से 
समझा दिया है मुझको
वक्त अच्छा हो या बुरा 
वक्त बदल जाता है

और बुरे वक्त का बदलना तो अच्छा लगता है
पर अच्छे वक्त के बदल जाने की 
कल्पना से भी 
मन दहल जाता है,.....प्रीति सुराना

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना शनिवार 21 जून 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  2. क्या बात है। बढ़िया

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  3. बहुत सुंदर

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