Tuesday, 27 August 2013

रहना है मुझे ऐेसे,..

सुनो !!

मेरे पास 
तुम्हे देने के लिये कुछ नही है 
सिवाय अहसासों के 
फिर भी 
एक चाह है मन में  
एक दिन 
मैं तुम्हे अपना सब कुछ देकर 
"निःशेष" हो जाऊं,...

मेरे पास 
तुम्हे कहने के लिए कुछ नही है
सिवाय प्रेम के
फिर भी 
एक चाह है मन में 
एक दिन 
मैं तुम्हे सबकुछ कहकर 
"निःशब्द" हो जाऊं,..

मेरे पास 
जब कुछ भी नही हो जो मेरा हो
सिवाय समर्पण के
तब एक चाह है मन में 
एक दिन रहना है मुझे ऐेसे 
"मैं" रहूं 
पर 
खुद में "मैं" रह न जाऊं,.....प्रीति सुराना

12 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - बुधवार- 28/08/2013 को
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः7 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

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  2. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें,सादर!!

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  3. खुबसूरत अभिवयक्ति......श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें......

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  4. बहुत अच्छी कविता.
    http://yunhiikabhi.blogspot.com

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  5. समर्पण का उत्कृष्ट भाव लिए ... प्रेममयी रचना ...

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  6. अनुपम भाव प्रीति जी

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