Saturday, 16 March 2013

"पानी बचाओ"


हर जगह चेतावनी 
पढ़ते-सुनते 
"पानी बचाओ","पानी बचाओ"
गरमी की आहट पाते ही,
कुछ यूं असर हुआ,..
आंसुओं ने बहना छोड़ दिया,..
आजकल जमा कर रही हूं,
उन आंसुओं को 
जज़बातों के प्याले में,....
ताकि दर्द के तपते मौसम में
मेरे मन का पंछी 
प्यासा न रह जाए,.....प्रीति सुराना

16 comments:

  1. भावपूर्ण प्रस्तुति,आभार.

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  2. पानी एक.....
    अर्थ अनेक
    सुन्दर रचना....


    सादर

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  3. पानी तेरे कई रंग ...
    भावपूर्ण सुन्दर ..

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  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (17-03-2013) के चर्चा मंच 1186 पर भी होगी. सूचनार्थ

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  5. पानी गए न उबरे मोती मानस चुन
    latest postऋण उतार!

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  6. बहुत खूब भाव पूर्ण प्रस्तुति

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    एक शाम तो उधार दो

    मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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