Thursday, 17 May 2012

एक अजीब सा लम्हा


अभी अभी गुजरा 
एक अजीब सा लम्हा 
मेरी जिंदगी की राह से
जिसमें 
लबों पे हंसी
आंखों में नमी
दिल में सुकुन
जेहन में शिकायत
गुस्से की ओट में
प्यारा सा एहसास
कुछ पाने की खुशी
फिर भी मन उदास
तनहाई में बसा
किसी की मौजूदगी का विश्वास
यहां तो अकेली हूं मैं
फिर ये कैसा आभास
कौन है वो जो था 
अभी अभी मेरे पास,........प्रीति

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