Tuesday, 6 December 2011

दर्द,जख्म,आंसू


आज

चंद दोस्तों से मुलाकात हुई
मेरी कविताओं पर कुछ बात हुई,...



किसी ने कहा 
बहुत दर्द है आपकी बातों में,
किसने दिए इतने दर्द?
मैनें कहा
कुछ दर्द अपनो ने दिए हैं,..
कुछ दर्द सपनो ने दिए हैं,..

फिर पूछा
उसने
किसने तोड़े आपके सपने,..?
मैनें कहा
कुछ अपनो ने तोड़ दिए,..
कुछ आंसुओ में बह गए,..

उसने फिर पूछा
कंहा से आए इतने आंसू ,..?
मैनें कहा
कुछ अपनी ही कही बातें हैं,..
और कुछ अपनो के दिए जख्मों के हैं,..

उसने फिर कहा
हम भी तो हैं आपके अपने
बताइए तो सही किसने दिए,
दर्द,जख्म,आंसू और तोड़ दिए सपने,..?
मैनें बस इतना ही कहा,
कैसे कहूं
कि
आप भी तो हैं अपने,....प्रीति

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