Friday, 9 December 2011

कैसे भूल पाऊंगी?


बाबुल की देहरी जब होगी पराई
तो कैसे भूल पाऊंगी????
ये घर,ये आंगन,
और यंहा बीता वो बचपन,..

बाबुल का साया,वो ममता का आंचल,
भैय्या का प्यार,भाभी का अपनापन,
वो बचपन की यादें,वो सखियां सहेली,
जब ससुराल चली जाऊंगी,तो कैसे भूल पाऊंगी?
बाबुल की देहरी जब होगी पराई,तो कैसे भूल पाऊंगी????
ये घर,ये आंगन,और यंहा बीता वो बचपन,..

वो हंसना खिलखिलाना,वो रूठना,मनाना,
त्यौहारों मे अपना अंदाज खुशियों का,
वो लड़ना, झगड़ना,शरारतें,बतियाना,
जब ससुराल चली जाऊंगी,तो कैसे भूल पाऊंगी?
बाबुल की देहरी जब होगी पराई,तो कैसे भूल पाऊंगी????
ये घर,ये आंगन,और यंहा बीता वो बचपन,..,....प्रीति


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