Friday, 9 December 2011

"सपनो का घरोंदा"


तिनकों तिनकों के सहारों से,

दिल के हजारो अरमानों से,
एक बड़ा ही प्यारा सा घरोंदा बनाया था,
अपनी कल्पनाओं और सपनो से जिसे सजाया था,
जिसमें प्यार की जमीं थी,
ममता की छत थी,
दुलार की दीवारें थी,
अपनापन था हर कोने में,
दिल ने चाहा था कि
हम बस जाएंगे ऐसे ही किसी जहान में,
जंहा प्यार ही प्यार हो हर चीज में,...
पर ये तो एक सपना था,
यही तो बस अपना था,
एक आंधी चली जोरो की,
ले उड़ी प्यार की जमीं,
हर वो चीज जिसमें प्यार था,
तिनके तिनके होकर बिखरा,
बस एक ही झोंके ने,
उजाड़ दिया मेरे "सपनो का घरोंदा",......प्रीति

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