Thursday, 1 December 2011

शिकवा


हर वक्त तनहा रहकर ये जाना,
जहाँ मे अपना नही कोई,
हर शक्स बेगाना,...
वो जमाना नही ये,
जहाँ प्यार मिलता है,
ये जमाना है वो,
जहाँ प्यार बिकता है।
जब जब प्यार के फूलों को जिदंगी में खिलाना चाहा,
नफरत का शोला भड़का और आशियां जलाना चाहा,..
ये लोग नहीं ये,
जो प्यार करें,
ये लोग हैं वो,
जो बिकते हैं।
जब जब मैने किसी को कहा अपना,
हर बार लोगों ने कहा मुझे बेगाना,..
लोगों का दोष नही,
ये दोष है शायद मेरा,
जो मांग लिया मैने,
बेदर्द जमाने से सहारा।
जब जब उल्फत से किया मैने कोई गिला,
हर बार दिल टूटा पर न दूर हुआ मेरा शिकवा,..प्रीति

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