एक बात समझा मुझे
जब सच ये है
कि तू बहुत सीमित है
थोड़े में संतोष करना ही
फितरत है तेरी
फिर तेरे बहाने
इच्छाओं ने अपना आकाश
अनंत क्यूँ बना रखा है
जबकि
जरुरत में संतुष्टि
और
इच्छाओं में अतृप्ति
इस सत्य से सृष्टि का कण-कण परिचित है!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



सुंदर रचना
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