तुम हर बार
याद दिला जाती हो
कि तुम गोल हो
सुख के बाद दुख भी
दिन के बाद रात की तरह आते हैं
पर सुना तो ये भी था
कि तुम अक्ष पर थोड़ी सी चपटी हो
सुनो न!
अपने उसी अक्ष पर
सुख के कुछ लम्हे समेटे
ठहरों न कुछ पल
मेरे लिये,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना
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