ऐ दिल,
ज़रा रुक!
मत फंस अपेक्षाओं
और इच्छाओं के भँवर में
अपेक्षाएँ उपेक्षा का कारण बनेगी
और
इच्छाएँ दुख का
परिणाम
पीड़ा, पीड़ा और पीड़ा
और कोई नहीं जो उठाना चाहेगा
पीड़ा का बीड़ा!
ऐ दिल, तन्हाई को बना ले साथी
यदि ख्वाहिशों के मरने के दर्द से बचना हो!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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