समय सीमित है
और इच्छाएँ अपरिमित है
बढ़ने की इच्छा तो है
पर भाग्य में कद पूर्व लिखित है
चलना तो है सीधे रास्ते
पर मन से साहस ही विलगित है
सहारा देने को हाथ बढ़ाते हैं लोग
स्वार्थवश थाम लेना हाथ क्या उचित है
सपनों को ऊंची उड़ान तो दे दूँ
पर आसमान में रहना भी तो वर्जित है
मेरे लिए यही जमीं स्वर्ग है
जो अपनों के प्रेम से सिंचित है
हाँ!
पर समय सीमित और इच्छाएँ अपरिमित है।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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