बहुत खुशकिस्मत होते हैं वो
जिनके सपनों से अपने जुड़ते हैं
और वो सबसे ज्यादा खुशकिस्मत होते हैं
जो अपने बड़ों और बच्चों दोनों के सपनों से जुड़ते हैं
सच बहुत-बहुत खुशी मिलती है
ऐसे ही कुछ पलों में जब सब साथ हो
कुछ भी करना सार्थक हो जाता है
सिर्फ स्नेह और आर्शीवाद के सम्मिलन से!
हाँ!
29 जून को ऐसा ही समय जीया हमने जब
विनय भैय्या की "अंडमान की अविस्मरणीय यात्रा" और तन्मय की "आपातकालीन सृजन" की किताबें विमोचित की अपनो के बीच।
जहाँ विनय भैय्या को शब्द सारथी से सम्मानित किया तो वहीं तन्मय को कलम के सिपाही के रूप में प्रोत्साहित किया। विनय भैय्या-मणि भाभी, श्रयन्स, आयुष्य, गोपाल भैय्या- राधिका भाभी, यश, कृश, संदीप भईया-संगीता भाभी (तन्मय को भी बहुत मिस किया जो अभी ऑस्ट्रेलिया में है), रामानन्द भैय्या जो स्वयं भी शब्द सारथी हैं, समकित, तन्मय, जयति, जैनम, सबकी उपस्थिति में परिवार का महत्व, बड़े और छोटों का अपनापन सब कुछ ही पलों में झोली में समेट कर रख लिया है मैंने। यादों का ये पिटारा मेरे लिए बहुत कीमती है जिसके लिए आप सभी का तहे दिल से आभार, आप सबका आना मेरे लिए बहुत मायने रखता है, आप सब आते रहिएगा।
स्नेह और आशीर्वाद की आकांक्षा लिए
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



0 comments:
Post a Comment