Monday, 29 June 2020

मेरे अंदर-बाहर

मेरे अंदर
सपनों के टुकड़े हैं
टुकड़ों की चुभन है
चुभन से दर्द है
दर्द से आँसू हैं
लेकिन ऑंसू थम गए
पलकों तले
मेरे बाहर
क्षितिज है
आसमान है
पहचान है
मुस्कान है
सारा जहान है
सब साथ दिखते है
पर सवाल सिर्फ एक है,...

भरी दुनिया में आखिर दिल को समझाने कहाँ जाएँ?
मोहब्बत हो गई जिनको वो दीवाने कहाँ जाएँ?

#डॉप्रीतिसमकितसुराना

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