जब दिल लिया
तब पूछा था क्या
जान भी दोगे?
जब कर्तव्य गिनवाए
तब कहा था क्या
अधिकार भी दोगे?
जा हाथ छोड़ा
तब बताया था क्या
दगा भी दोगे?
खैर छोड़ो!
ये इश्क है जनाब
कुर्बानियों और समर्पण से पीछे नहीं हटता,
इश्क किया होता तो पता होता तुम्हे भी,..!
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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