मन कागज की नाव
बहने का है चाव
इक नदिया संसार
सुख-दुख है दो पार
रिश्ते नाते साथ
है सपनों का गाँव
रहते सारे साथ
है कोई न अनाथ
खुशियाँ भी ले बाँट
साझा सबके घाव
जीवन जैसे खेल
दिल से दिल का मेल
कोई जीत न हार
कौन लगाये दाँव
चलते अपनी राह
सबकी अपनी चाह
अड़ते जब हो मुश्किल
ज्यों अंगद का पाँव।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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