ॐ शान्ति
बहुत दर्द होता है
जब कोई अपना
असमय छोड़ कर चला जाता है
दूरियाँ कितने भी किलोमीटर्स की हो
दिल से जुड़े तारों में
रुदन का बेसरुरा स्वर छिड़ ही जाता है
किस-किस को संभालेंगे या देंगे सांत्वना
इस पल परिवार का हर सदस्य
पीड़ा के अतिरेक में घिरा नज़र आता है
अब संभाल तू ही सबको, तू तो विधाता है
ऐसा समय क्यूँ दिखलाता है
कहाँ से लाएं उमंग और उत्साह जीने के लिये
ऐसे पल में धीरज का बांध भी टूट जाता है।
ऐसे क्यों अपनों का साथ बीच राह में छूट जाता है,
संभाल आज मुझे भी तू ही दादा, तू ही शांति प्रदाता है।
भाभी जहाँ भी हो आत्मा को शांति मिले,
बुआजी, सुरेश भैय्या, विनीत, ऋषि और पूरे परिवार को समय का यह कुठाराघात सहने की हिम्मत देना प्रभु यही प्रार्थना है आपसे।
#डॉप्रीतिसमकितसुराना



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